जब तक गंगा नदी पर पुल नहीं बन जाता नौरंगा ग्राम सभा के लोग शांत नहीं बैठेंगे

5MN: वादे, विश्वास और विकास! क्या सिर्फ कहानी है? या फिर लोगों के दिलों की ढांढ़स देने भर की बात रह गई है? क्योंकि साफ-साफ तो यही नज़र आ रहा है। और अब सिर्फ एक ही सवाल रह गया है- क्या सपना बनकर ही रह जायेगा नौरंगा ग्राम सभा के लिए गंगा नदी पर पुल का बनना?

वो दिन सबको याद है
नौरंगा ग्रामवासियों को अभी तक याद है अप्रैल 2018 की चुनावी जनसभा। जब उत्तर प्रदेश (UTTAR PRADESH) के उप मुख्यमंत्री  और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आये थे और लोगों ने जी जान से स्वागत किया था। लेकिन उसका क्या परिणाम हुआ सब के सामने है? लोग तो यही सोच रहे हैं कि अब तक तो शुरुवात हो जानी ही चाहिए थी। लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हो पाया।

लोगों की कोई गलती नहीं
एक बात तो बिल्कुल साफ है कि इसमें नौरंगा ग्राम सभा के लोगों की कोई गलती नहीं। क्योंकि उन्होंने अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ पाया। हर तरह से अपना समय देकर और अपना पसीना बहाकर नौरंगा ग्राम सभा के लोगों ने पूरा प्रयास किया। यहाँ का हर एक युवा अपना जी जान से योगदान दिया है। लेकिन फिर भी अगर इनका प्रयास निरर्थक जाता है, तो चुनाव के समय झूठे वादे करने वाले लोगों को इसका परिणाम भुगतने पड़ेगा।

नौरंगा ग्राम सभा के लोगों को कमज़ोर ना समझें नेता
चाहे किसी भी पार्टी के नेता हों, झूठे वादे कर के दिलासा देना और बहलाने का समय चला गया। अभी कुछ दिनों पहले ही यहाँ के लोगों ने चुनाव बहिष्कार कर नेताओं को अपनी औकात दिखलाई थी। तब कई नेता सकते में आ गए थे और यहां पहुंच कर लोगों को मनाए थे और वादा किये थे कि इस गाँव में विकास ज़रूर होगा। लेकिन अब भी विकास नहीं हुआ तो यहां के लोगों को कमज़ोर और मूर्ख ना समझें कोई भी नेता। क्योंकि अबकी बार बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी और इस बार “मौका ना मिलेगा किसी बहाने का, किसी को बहलाने का”। इस बार नौरंगा ग्राम सभा के लोग भी करारा ज़वाब देंगे। क्योंकि इंतज़ार की भी एक हद होती है।

ज़ारी रहेगी लड़ाई
हर दिन , हर कदम पर ज़ारी रहेगी लड़ाई। जब तक गंगा नदी पर  पुल नहीं बन जाता तब तक नौरंगा ग्राम सभा के लोग शांत नहीं बैठेंगे और ना ही अब किसी नेता के बहलावे में आएंगे और इस बार चुनाव बहिष्कार बड़े पैमाने पर होगा।

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