कारगिल विजय दिवस: देश के उन वीर जवानों को नमन, जिन्होंने पाक के छुड़ाए थे छक्के

कारगिल विजय दिवस: सन 1999, जब पाकिस्तान अपनी नापाक़ इरादों के साथ कारगिल पर धावा बोल दिया था। उसका मंशूबा था कारगिल पर विजय हासिल करना। लेकिन तब शायद उसे भारतीय सेना की ताक़त का अंदाज़ा नहीं था।
जब भारतीय सेना और वायुसेना ने पाकिस्तानी सेना पर आक्रमण किया तो उनके होश उड़ा दिए। पाक सेना को पीछे भागना पड़ा। हालांकि, दोनों देशों के बीच यह युद्ध ऊंचाई वाले इलाके पर हुआ, जिससे दोनों देशों को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ा था।

कारगिल युद्ध के लिए पाक की तैयारी

तब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री परवेज मुशर्रफ थे और कारगिल युद्ध के तैयारी पाकिस्तान में 1998 से ही शुरू हो चुकी थी। भारत और पाक सेना के बीच लड़ाई होने से कुछ सप्ताह पहले जनरल परवेज मुशर्रफ ने हेलिकॉप्टर से नियंत्रण रेखा पार की थी और भारतीय भूभाग में करीब 11 किमी अंदर एक स्थान पर रात भी बिताई थी. इस काम के लिए पाक सेना ने अपने 5000 जवानों को कारगिल पर चढ़ाई करने के लिए भेजा था.

फिर भारत ने दिया करारा ज़वाब

पाकिस्तान अपने नापाक़ इरादों को अंज़ाम में देने में लगा था। भारत को यह बात पता चली और भारतीय सैनिकों ने ज़वाबी हमले की तैयारी की और फिर दिया पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब। इस युद्ध में पाकिस्तान के 3000 सैनिकों को भारतीय सेना ने मार गिराया।
हालांकि, इस युद्ध में भारतीय सेना ने भी अपने कई जांबाजों को खो दिया। लेकिन अंत में पाकिस्तान के छक्के छुड़ाते हुए भारत ने कारगिल पर झंडा लहरा दिया।
इस कारगिल युद्ध में शहीद हुए जवानों के सम्मान के लिए हर साल 26 जुलाई को भारत में “कारगिल विजय दिवस” मनाया जाता है।

5Minutes News, कारगिल युद्ध में शहीद हुए भारतीय जवानों को कर रहा है नमन और दिल से कह रहा है-
“शहीदों की चिताओं ओर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पे मारने वालों का बाक़ी यही निशां होगा”। जय हिंद।

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