Mahashivratri: क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि, जानिए

Mahashivratri

  • धूमधाम से देश में मनाई जा रही है महाशिवरात्रि
  • पुरुष और प्रकृति के मिलन का महाउत्सव
  • क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि

Mahashivrstri 5Minutes News:आज महाशिवरात्रि का महापर्व देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। आस्था का महापर्व महाशिवरात्रि के दिन सभी भक्त भगवान शिव को विधि पूर्वक पूजा करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि “हे भोलेनाथ! हमारे जीवन के सारे दुखों का नाश करो और हम पर कृपा दृष्टि डालो”

पशुपतिनाथ

इस सृष्टि में भगवान शिव ही एक मात्र ऐसे देवता हैं जिनकी पूजा हर कोई करता है। ना सिर्फ इंसान, बल्कि असुर से लेकर जानवर, पशु-पक्षी तक भी भोलेनाथ की आराधना करते हैं। इसलिए शिव को पशुपतिनाथ भी कहा गया है।

देवों के देव महादेव

अगर आप देखें तो कई युगों से यह विदित है कि इस सृष्टि में शिव ही एक ऐसे देवता हैं, जो बहुत ज़ल्दी खुश हो जाते हैं और अपने भक्तों को मनचाहा वरदान भी देते हैं। साथ ही साथ यह भी विदित है कि भगवान भोलेनाथ ही एक ऐसे देवता हैं जिन्हें भांग, धतूरा आदि प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है। तभी तो कहते हैं “देवों के देव-महादेव”, “कालों के काल- महाकाल”।

महाशिवरात्रि की कथा

क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि? कहते हैं कि महाशिवरात्रि का दिन पुरुष और प्रकृति के मिलन का दिन है। भगवान शिव आज ही के दिन वैराग्य को त्याग कर गृहस्थ जीवन में प्रवेश किये थे।

सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में प्राण का त्याग किया था, जिसके बाद शिव वैरागी बन गए थे और फिर तपस्या में लीन हो गए थे। इसके बाद इधर सती ने पार्वती के रूप में राजा हिमाचल के घर में जन्म लिया।

दूसरी तरफ ब्रह्मा जी ने असुर तारकासुर को यह वरदान दे दिया कि उसी मृत्यु जब भी होगी शिव पुत्र के हाथ ही होगी। पार्वती जी भी इधर तपस्या कर रही थी शिव को पाने के लिए। लेकिन शिव जी अभी भी सृष्टि से परे तपस्या में लीन थे। देवताओं ने सोचा कि अगर शिव जगेंगें नहीं, तो ना तो वो वैराग्य का त्याग करेंगे और ना ही पार्वती से विवाह करेंगे। तो ऐसे में तारकासुर का वध मुश्किल है।

देवताओं ने कामदेव को भोलेनाथ की तपस्या भंग करने के लिए भेजा, जिसे भोलेनाथ ने जला कर भस्म कर दिया। लेकिन भगवान शिव जग गए और फिर देवताओं ने उन्हें पार्वती से विवाह के लिए राज़ी कर लिया।

इस सृष्टि का सबसे अनोखा और अद्वितीय विवाह भगवान शिव का ही था। आज तक ऐसा विवाह ना किसी ने देखा था और न ही सुना था। जिस दिन शिव और पार्वती का विवाह संपन्न हुआ, उसी दिन से महाशिवरात्रि मनाने की परम्परा चली आ रही है।

कहते हैं कि सच्चे दिल से जो भी भगवान शिव की आराधना करता है, उसकी हर कामना पूर्ण होती है।

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