Campaign: एक साथ लोगों की उठती आवाज़ ही अब नौरंगा ग्राम सभा की एक नई कहानी लिखेगी

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गंगा किनारे बसे दो गाँव, भुआलछपरा और नौरंगा की कहानी, महज़ सिर्फ कहानी नहीं है. बल्कि हकीकत का वो फ़साना है, जिसे बयाँ किया जाये तो शब्द कम पड़ जायेंगें. एक तरफ जहां दुनिया अन्तरिक्ष के लिए उड़ान भर रही हैं, वही आज भी इन गांवों के लोग अपनी तक़दीर और तस्वीर बदलने के लिए हर दिन एक नई जंग लड़ने को मजबूर हैं.

“हो गयी है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए…मेरा मक़सद सिर्फ हंगामा खड़ा करना नहीं, सारी कोशिश है कि सूरत बदलनी चाहिए”. नौरंगा और भुआलछपरा ग्रामवासी यही कह रहे हैं शायद. लेकिन पूछ भी रहे हैं- कब, आख़िर कब बदलेगी सूरत? जिंदादिली से ज़िंदगी को जीने वाले यहाँ के लोगों का अब सब्र का बाँध टूटने लगा है. और अब यहाँ के लोगों की बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी.

पिछले कई वर्षों से यहाँ के लोगों से वादा किया जाता रहा है, विकास का. यहाँ के लोगों को भरोसा दिया जाता रहा है, गाँव की सूरत बदलने की. लेकिन ये सारे वादे जुमले ही निकलते हैं. इन्हीं जुमलों से परेशान हो कर 2018 में इन गांवों के लोगों ने चुनाव बहिष्कार किया था. फिर जम कर हंगामा हुआ था. इसके बाड़ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के साथ-साथ कई अन्य नेताओं का पदार्पण हुआ था और विशाल जन सभा का आयोजन किया गया था.

नौरंगा और भुआलछपरा की जनता की सबसे लड़ाई जो थी और जो आज भी है- वो है गंगा नदी पर पक्का पुल की निर्माण की. लेकिन पिछले साल पता चला कि गंगा नदी पर पक्का पुल का निर्माण तो होगा, लेकिन नौरंगा घाट पर नहीं, बल्कि शिवपुर घाट पर. यह सुनते ही यहाँ के लोगों को जैसे सदमा सा लग गया हो. हर जुबां खामोश थी, निगाहों में दर्द के बादल थे. बेशक़ ये बादल बरस नहीं रहे थें क्योंकि यहाँ के लोग रोना नहीं हर चुनौती का जिंदादिली से सामना करना जानते हैं.

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नौरंगा गंगा घाट पर बना हुआ पीपा का पुल लोगों का सहारा तो है, लेकिन कई परिवार और कई अपनों को बेसहारा भी कर दिया इसने. अभी चंद दिनों पहले ही इसी पीपा पुल से एक ट्रैक्टर गंगा नदी में गिर गया और नौरंगा ग्राम सभा के एक व्यक्ति की जान चली गयी. हालांकि, यह पहली मर्तबा नहीं है. इससे पहले भी यहाँ कई ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं. लेकिन सवाल उठता है, आखिर कौन है इसका ज़िम्मेवार? और अब तक जाती रहेंगी इसी जानें?

गंगा नदी में गिरा ट्रैक्टर

नौरंगा और भुआल छपरा गाँव के लोग नेताओं से कह रहे हैं- आप तो हमारे गाँव में हवाई मार्ग से पहुंचे थे. कभी आईये पीपा पुल से हमारे गाँव. तो आपको शायद महसूस होगा कि हम रोज़ कैसे बदहाल परिस्थिति से टकराते हैं. एक जंग लड़ते हैं वक़्त से और खुद से.

Campaign: तक़दीर और तस्वीर बदलने की तैयारी

लेकिन अब यह जंग फिर से छिड़ चुकी है और बड़े स्तर पर लड़ी जायेगी. यहाँ के लोगों की आवाज़ अब उठेगी और अब यहाँ के लोग बदल देंगे या बदल जायेंगे. अब यहाँ के लोगों ने फैसला ले लिया है कि ज़रूर होगा, कुछ और बहुत कुछ होगा.

पीपा पुल पर हुए हादसे के बाद नौरंगा और भुआलछपरा गाँव के लोगों के बीच आक्रोश है. सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रया से यह साफ़ ज़ाहिर हो रहा है कि अब आर या पार की लड़ाई होने वाली है. चाहे किसी भी पार्टी या दल के नेता क्यों ना हो अब यहाँ की जनता ने ठान लिया है कि अब जो करेंगे हम करेंगे, वादों में अब नहीं फसेंगे.

किसी भी नेता की नज़र इस घटना पर पड़े या नहीं. लेकिन नौरंगा ग्राम सभा के सभी लोग इस घटना में जिस व्यक्ति की जान गयी उसके साथ खड़े हैं. इतना ही नहीं कई हाथ मदद के लिए भी आगे बढ़ रहे हैं. देश की सेवा में कार्यरत भुआल छपरा ग्राम के निवासी प्रमोद पाण्डेय जी ने पीपा पुल हादसे में मृत व्यक्ति के परिवार के लिए एक कदम बढ़ाया है और आर्थिक तौर पर मदद करने का निर्णय लिया है. निश्चित तौर पर ऐसे में सभी को आगे आना चाहिए.


मदद को आगे आते हाथ

यहाँ के लोग फिर से अब आन्दोलन की तैयारी में जुट चुके हैं. एक साथ यहाँ की जनता की उठती आवाज़ इस बार ज़रूर एक नई कहानी लिखेगी. और यहाँ के सभी लोग यही कह रहे हैं- “हमें मंजिल मिले या नहीं, इसका ग़म नहीं, मंज़िल की जुस्तजू में मेरा कारवाँ तो है”.

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Author: 5 Minutes News

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